संस्था गीत

ज्योतिर्मय यह देश हमारा ज्योतिर्मय यह देश हमारा

धवल हिमालय के ललाट पर अरुण-तिलक अतिन्यारा-ज्योतिर्मय...

कोटि-कोटि संवत्सर से यह, चलता पथिक सनातन।

अन्धकारमय पतन-निशामें, दीप्तिमान सपनों सा पावन॥

पुण्य श्लोक यह श्रेय पंथ को कोटि-कोटि, जनगण का प्यारा-ज्योतिर्मय...

महिमामय स्मृतियों से जगमग, अजर-अमर यह चिर-चिरसुन्दर।

जगत वंद्य विश्रुत गरिमामय, अगणित गुणगाथा से मनहर॥

यह पुराण नितनूतन गतिमय,जीवन-मरणसहारा-ज्योतिर्मय...

घोर मूर्छना में स्पन्दमय, जागृति में कम्पित पीड़ामय।

प्रतिभामय संघर्षकाल में, आलोकित निर्माण कालमें॥

सिंधु तरंगों सागुंजनमय भारतवर्ष हमारा-ज्योतिर्मय...

उद्यत एक अखण्ड तेजमय, अमित ओज में सदाशीलमय।

नितहीमति, धृति कृति में प्रभुमय। गहन निराशा में आशामय॥

स्वर्ग-भूमि से भी बढ़कर यह नन्दन विपिन हमारा-ज्योतिर्मय...

- मनीषी पं. जनार्दन राय नागर